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गुरुवार, 3 फ़रवरी 2022

एक भारतीय का वायरस


 भारतीय का वायरस राजचित्र!

देश के मानस नक्शे पर दो ही बड़ी परिचर्चा है! वायरस और राजनीति। वैसे प्राकृतिक छींक ने  एक ही आ….. छी...में कई गंदगी निकाली। मगर राजनीतिक मलबे से कई वायरस और उसके अनोखे वेरिएंट निकल कर बाहर आ रहे हैं। इस विभिन्नता ने वायरस राजनीती में हाइब्रिड नेताओं का हल्लाबोल हूया है। आव देखा न ताव बस कूद पड़े हैं।इस इनैक्टिव और अजीवित वायरस ने हमारे समाज के कई जांबाज जिंदा भ्रष्ट- शिष्टाचारियों को उजागर किया है। स्वास्थ्य प्रणाली की कलई खुली हैं! मसलन ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, डॉक्टर, फार्मासिस्ट, दवाइयां इत्यादि। समाज के दशमुखी रावण मुखौटे उतरे  या बन गए, यह समझ से परे था। इलेक्शन से हुई राजनीतिक अनबन,राजनीतिक हमले और खूनी खेल। मौका भुनाने के सुअवसरों में एक विचित्र सी गहमागहमी देखने को मिली। 

राजनीतिक पर्दे उठ गए, इसी बीच इलेक्शन की डफली और नेताओं का राग। इस कोरोना वायरस में सबके अपने ही सुर हैं। बस आम आदमी बेसुरा है। उसकी ही बोलती बंद है। वैसे भी लॉकडाउन में सब बंद हैं, मगर खुली है फ़िल्में, सीरियल्स, दवाइयां, अस्पताल और तूफ़ान।वैसे भी इस देश में विभिन्न प्रकार की दिक्कतें है,ऊपर से ये वायरस। विभिन्नताओं वाले देश में वह भी कई रूप बना गया। इसके विभिन्न रूपों की सौंदर्य रस पर उत्साहित राजनीति का कुत्सित लावण्य खुल कर खिल गया। अब वैक्सीन पर भी काम बवाल नही । प्रधानमंत्री योजनाओं के तर्ज पर प्रधानमंत्री स्ट्रेन वाले वैक्सीन की घोषणा हुई। किसी बड़े कुशाग्र बुद्धि वाले नेता ने ख़ुद सबसे पहले लगवा के जनता में इसका डंका पीट  कर आतंकित करने की लादेन मंशा का हिंट दिया। ऐसे चिंतनशील नेताओं में लोगों के प्रति ममत्व व प्रेम उमड़ रहा है। अब तो हर ओर जनता "बच्चे" समान हो गई है। वोट बैंक के नागरिकों के लिए अब यह एक नई प्रकार की  राजनीतिक मानवता है। 

ऐसी मानवीयता दुर्लभ है! ऐसे संवेदनशील नेता ऑक्सीजन के पीछे रोते पाए गए, जो बिजली पानी मुफ़्त बांट रहे हैं। उधर मीडिया भी कोरोना और उसके नए बहरूपियों की ज्ञान गंगा बहाने में पीछे नहीं। उधर गंगा में लाश बह रही है। इधर रेतों के टीलों में छिपी लाश गंगा को बचा रही हैं। फूल, मूर्तियाँ  तक तो ठीक था और अब  लाश भी! अब आत्माओं के बाद गंगा को ही मुक्त करेंगे। नमामि गंगे! हर हर गंगे! भर दो गंगे!

इल्जाम का वायरस अभी भी मंडरा रहा है। कभी राजनीति पर,कभी ऑक्सीजन पर, कभी वैक्सीन पर,कभी डॉक्टर पर, कभी फार्मेसी पर, कभी लॉकडाउन पर!सब फेंक रहे एक दूसरे पर इल्ज़ाम! इस राजनीती में चीन छोड़कर सब बदनाम!समझ ही नही आ रहा की किसे कोसा जाए? हाय हाय वायरस, हाय हाय कॉरोना। अभी अभी एक नई आवाज सुनाई दी। ओ…माइक्रोन! ऐसे लगा कि फिर से प्रकृति की  छींक आ गई ।अब इडियट बॉक्स पर  नवीन राग अल्पाए जाएंगे या एक यह एक मूक बधीर चलचित्र साबित होगी! आइए जानते हैं अन्तराल के बाद।

स्मृति सिंह

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