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रविवार, 23 अक्टूबर 2022

रावण ने जब फूलन देवी का अपहरण किया...

 बात उन दिनों की है जब रावण तक बात पहूंची की चम्बल में एक नारी है। वह बड़ी ही बलवती है, और ना जाने कितने पुरूषों का संघार कर चुकी है। शायद कोई पुरुष नही बचा घोर कलयुग में,इसीलिए हे रावण तुम जाओ अपनी जैसी ही नारी का अपहरण करो। क्या पता तुम्हारे अपहरण कृत्य को कुछ राहत मिले!  रावण: पर एक प्रश्न है ! पिछली बार तो लंका नगरी भस्म हो गई थी इस बार तो ऐसा नही होगा ना? उत्तर: अब हर कोई सीता तो नही होता न! रावण: फिर ठीक है! अब रावण भी सोचने लगा कि अवसर अच्छा है,वरना आज तक सीता के अपहरण के लिए बदनाम हो गया हूं! चलो इसी बहाने...

जाने से पहले सुनो रावण ! वो कलियुगी नारी है,उसके पास बंदूक है। उसे यह भी मालूम है कि तुम्हारे नाभि में अमृत है। तो तुम भेष बदल लो! तुम एक भद्र पुरुष सा दिखने वाले नर का रूप लो। यानी कोई उसी के जैसा! सुनो रावण दान वान वो देती नही तो साधु बनने की कोशिश न करना। और जबरन भी न करना ,वरना सीधी गोली तुम पर ही जाएगी। और अपना स्वर्ण महल थोड़ा realistic बनाओ और इसे e-house का रूप दो।  और रावण बेचारा सोचने लगा की इससे तो सीता ही भली थी। जो भी था अपहरण तो कर ही लिया था! ये तो कोई अदभुद नारी है! 

इसी वैचारिक ऊहापोह में, वह योजना बनाने लगा - कैसे सफ़ल योजना बनाई जाए ? अब कोई फॉर्मूला निकालता हूं । हां आइडिया! बोलूंगा बीहड़ से दूर हे सुंदर नारी,एक बड़ी ही अदभुद जगह है । तुम रानी बन के रहोगी और ये डाकिन का धब्बा भी मिट जाएगा। मैं उस प्रदेश का राजा हूं। अब कौन सी नारी ऐसा प्रस्ताव ठुकराएगी? चलो चलो,इस कौंधते विचार का झटका फूलन देवी को भी लगे।

इधर फूलन देवी भी देवी पूजा में लगी थीं। तभी रावण भी पहुंचता है और बगल में बैठ कर उसके उठने का इंतज़ार करता है। तभी प्रसाद देने की आवाज सुन कर आंखे खोल कर उसे पास पाता है। बड़े ही सम्मान से प्रसाद खाता है और बड़े ही सुन्दर शब्दों में धन्य धन्य कहता है। फूलन देवी बड़ी ही चकित होती है। और पूछती है - काय कछु खाए नही हो क्या? कितै दिनों के भूखे हो? रावण - कहता है कि हा बस ऐसा ही समझ लो! मेरे घर पर है नही कोई पकाने वाली तो इसलिए...तभी फूलन बोलीं - हम डाकू है ,खाने पकाने की नौकरी नही करते। रावण- तो नौकरी न करो, पर साथ चलोगी तो कुछ  न कुछ हो ही जायेगा! 

फूलन को दया आई और चल पड़ी! बताओ कहां चले? रावण अपनी माया से विमान ले आया । प्राइवेट जेट देख फूलन की आंखे खुली खुली गई। झट से विमान में और जूं...! रावन लोक में! बैंडिट क्वीन ने कहा - अरे वाह ! तुम तो काफी अमीर हो! फिर मुझे क्यों लाए? चल सही सही बता। रावण: अरे नही देवी ! ऐसी कोई बात नही! बस मन किया तो सोचा कि तुमसे बात की जाए! फूलन देवी - अच्छा?!किस बात की कमी है?! खाना पकवाने के लिए मैं ही मिली? 😂😂😂😂!!!

रावण - नही नही! बात खाने की नही है, अब ये घर पसंद आया हो तो बात बढ़ाऊं। फूलन- हैं! क्या बात है? क्या बढ़ाएगा? चल किचन दिखा? किचन में मशीन लगी थी सब रेडी था। फूलन देवी बड़ी अचम्भित हुई। सोची चलो बढ़िया है ! इसी बहाने बीहड़ में भटकना नहीं पड़ेगा! बैठे बैठे खाने को मिलेगा! रावण और फूलन खाने लगे! क्रमशः फूलन देवी बड़े ही सुख पूर्वक जीने लगी! तभी रावण सोचता है अब पट गई चलो अब बोल के देखता हूं। उधर फूलन देवी बोर होने लगी! उसे अपने दोस्त याद आने लगे। वो बोली की चलो अब इसे बाई बाई बोलती हूं! अपनी जगह चलती हूं!

फूलन देवी: अब वो जाने लगी की e- गेट का दरवाजा ही ना खुले! वो बड़ी घबरा गई! रावण: के पास पहुंची बोली की देखो अब मेरा यहां दिल नही लगता ! मुझे तो बीहड़ ही पसंद है! सो मैं चली वापिस! दरवाजा खोलो! रावण: हमारी मर्ज़ी के बिना यहाँ पर कोई पत्ता भी नहीं हिलता ! दरवाजा तो दूर की बात है ! Haha ! Haha! फूलन देवी: कौन ?कौन हो तुम? सच बोलो! रावण - अपने असली रूप में आता है! फूलन देवी भौंचकी रह जाती है! अबे साले ये क्या गजब हुई गवा! अबे चमत्कार! रावण????? रावण का भूत!  अबे बंदूक कहां गई? बंदूक निकाल कर फूलन ने बोला की जाने दो वरना यही गोली मार दूंगी!

 रावण: हम मायावी हैं चाहे तो तुम्हारी बंदूक को अभी भस्म कर दे! तुम कलियुगी नारी युद्ध की मर्यादा नही जानती ! हमने नारी जान कर तुम पर कोई शस्त्र नही उठाया! 

फूलन देवी: देखो सीधी सी बात है! हम पर जोर नहीं! दरवाजा खोलो। तभी रावण को चेतावनी याद आई। रावण एक बार फिर अपनी मौत से भयभीत और जग हंसाई से बचने के लिए बोला -जाने से कौन रोकता है! पर सुनो तुम सभी से यही कहना कि मैंने तुम्हारे साथ अप्रिय व्यवहार नही किया ! बिना तुम्हारी मर्जी के तुम्हे स्पर्श नही किया? थोड़ी मर्यादा मुझमें भी है! इतना कह कर दरवाजा खोल देता है!



फूलन देवी: सुनो अभिमानी रावण ! तुम एक गलती कब तक दोहराओगे? पहले भी अपनी लंका जलवा चुके हो! अब क्या बची कुची भी जलवायोगे! तुम्हारे पुराने कृत्य आज भी कई नर दोहराते है!  नारी को अपमानित करते है! उन्हे कमज़ोर समझते हैं! मेरा यह जीवन इसी पुरुष वादी कामुक मानसिकता का शिकार है! मुझे मर्यादा सिखाई गई मगर पुरुषों को नहीं! तुम भी अपने लोक से आकाशवाणी करवा देना कि नारी की इच्छा के विरुद्ध कोई भी कार्य नही करना चाहिए। मसलन महाभारत! अंबालिका और द्रौपदी की भूल गए लोग! नारी को कमज़ोर समझने की भूल करते हैं! और त्रेता में तुम मर गए हो फिर भी तुम्हारी कहानी को दोहराने के बाद तुम्हारा पुतला भी जलाते है! मगर अपने मन का रावण भूल जाते हैं।

यह दृष्टांत समय- यात्रा व नारी अपमान के इतिहास व वर्तमान समाज की स्थिति पर सामंजस्य बिठाने की कोशिश है।




शनिवार, 8 अक्टूबर 2022

रावण की राम पर जीत है दिवाली!

 शहर में अस्थमा का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है! क्या करें, इस प्रदूषण काल में इससे ज्यादा की उम्मीद नहीं। अस्थमा ही क्यों, नजला जुखाम और सुखी खांसी तमाम खड़े हैं बांह पसारे। और हो भी क्यों न, हम भी तो उन्हे ही इनवाइट करते हैं! मसलन कार का अत्यधिक प्रयोग, सिगरेट सेवन, खेतों को जलाना और सबसे अजीज पटाखे! जिनके बिना तो सांस लेना भी मुश्किल है। अगर पटाखे न हो तो दिवाली मने ही ना! राम जी के इंतज़ार से ज्यादा तो पटाखों की आतिश बाजी का रहता है। यह आतिशबाजी ना जाने किसके स्वागत में होती है? राम जी तो त्रेता में आए? तब तो लोगों ने दिए जलाए। पर आज कल तो न जाने क्या- क्या जलाए? जैसे किसी का बगीचा, किसी के कपड़े,किसी के हाथ पैर,किसी का चेहरा, कोई बाज़ार या किसी का घर। और मन गई दिवाली! दिवाली तो अब इन हादसों के बिना अधूरी लगती है। जब तक अखबार में पटाखों के विज्ञापन न आएं और विज्ञापन के फलस्वरूप जुड़ते आंकड़े जैसे किसी बीमारी का चलन,किसी का बहरा जो जाना,या हाई बीपी का शिकार होना या फिर जले कटे का निशान अखबार में पहले पन्ने पर प्रकाशित होना, तब तक दिवाली की मिठाईयां पचेंगी कैसे?

गुजिया की मिठास और लक्ष्मी पूजन के दिन पटाकों में लक्ष्मी की धज्जियां उड़ाना और  अट्टहास ,त्योहारी खेल का अभिन्न अंग बन गया है! बिना  पट- पट करते मसाला पाउडर के रोल और बंदूकों में गोलियों की तरह भरते नज़ारे, पुलिस अधिकारी बनने की बाल इच्छा और त्योहारों में अच्छाई बुराई की लड़ाई में शामिल होने का एक बाल मनुहार प्रयास सी लगती है। अंदर का रावण भी बाहर के रावण को जला कर सुख पाता है। विज्ञान के प्रगति का द्योतक रॉकेट अब बच्चों की पहुंच से परे नहीं! बस हनुमान की पूंछ की तरह एक छोर जलानी है , सीधा आकाश में श्या...आऊं !और 💥 बूम! बस मानो अगले वैज्ञानिक यही रॉकेट वाले ही बनेंगे। अनार की दानों की तरह बिखरे जले  मसाले,चकरी की तरह गोल गोल घूमने के बाद फर्शों पर अपनी निशानी छोड़ जाते हैं। बीड़ी में मसाले भर के देवी लक्ष्मी ब्रांड बनाम बीड़ी बम अब होठों से उतर कर छतों के किनारे और माचिस की तिल्ली का सहारा लेती है । ज़िद्दी बीड़ी होंठ से फेफड़े नही पकड़े तो बम बन गई। आतंकवादी कही की! यह बम लक्ष्मी तो आमंत्रित नहीं करती मगर कइयों की लक्ष्मी जला देती है। और भेदती है कई परतें। कपड़ों की परत, चमड़े की परत,दीवारों की परत,परदों की परत और बड़ी दूर तक की पहुंच है - ओज़ोन की परत। 

ओज़ोन की परत? जी हां! धरती को घेरती और हमें बचाती ऑक्सीजन की एक मोटी परत जिसके तले हम पल बढ़ रहे हैं और सांस ले रहे हैं। राम जी तो लक्ष्मण और सीता संग आए। और अयोध्या में खुशहाली लाए। रावण को मार गिराए! मगर हम खुद को मारने की धीमी गति के प्रयास में हैं! ना जाने किसको निमंत्रण देते हैं? अपनी मौत को या मासूम शरारत को जो हमें राम जी के आस पास  भी नहीं आने दे रही। अयोध्या वासियों ने उनका स्वागत बड़े धूम धाम से किया! नगर को दीयों से जला कर जगमगा दिया। जगमग जगमग दीए तुलसी के पौधोंकी शोभा और घर के रौनक को बढ़ाते और रामगमन को प्रकाशमान करते। मगर अब दीए चाइनीज हो गए! कौन तेल जलाए और घी! वो तो फैट बढ़ाती है। और महंगाई के ज़माने में घी ! किफायती सौदा तो पटाखे और चाइनीज लाइट्स ही लगती हैं। कुम्हार भी मुश्किल में हैं! दीए अब वो प्लास्टिक के भी रखने लगा। म्यूजिकल दिए अब मंदिरों के स्टेटस हैं। लेकिन इतने किफायती लोग हॉस्पिटल के बिल में कसर पूरी करते हैं। चलिए भगवान न करे ऐसा हो! मगर उठा  धुआं हमे तुरंत ना जलाता हो लेकिन बाद में त्वचा को सूर्य की बिना छनी पराबैंगनी किरणों का स्वागत करता है! त्वचा रोग और कैंसर की बड़ी संभावना महंगाई में आटा गीलाकर सकती है। 

तो धर्म युद्ध के साथियों आपके ज्ञान वर्धन में शामिल एक और सूची है -तुलसी के नीचे दीया जलाने से अयोध्या वासियों ने किसका स्वागत किया? स्वाभाविक सा उत्तर है राम आगमन का! और !? ओज़ोन परत का ! ये बात शायद ही किसी को मालूम हो कि अयोध्या वासियों ने  घी के दीए जला कर राम जी साथ साथ ओज़ोन परत को भी मोटा किया। कुम्हार को भी मोटा किया और बच्चों को भी । यानी स्वास्थ्य वर्धन भी और पर्यावरण का स्वागत भी !

अनजाने में ही सही, प्रदूषण का रावण जल कर हमें आनंदित करता है और ओजोन रूपी राम को भेद रहा है । ना जाने कौन सी दिवाली मना रहे है? 

हम किसका स्वागत कर रहे है - प्रदूषण

का या पर्यावरण का?

डाकिन चंबल और बीहड़ घाटी

रावण ने जब फूलन देवी का अपहरण किया...

 बात उन दिनों की है जब रावण तक बात पहूंची की चम्बल में एक नारी है। वह बड़ी ही बलवती है, और ना जाने कितने पुरूषों का संघार कर चुकी है। शायद क...